8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर 2.81 बनाम 3.15—किससे कितनी बढ़ेगी आपकी सैलरी?
Calculation Report | January 10, 2026
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सबसे बड़ी पहेली ‘फिटमेंट फैक्टर’ है। वर्तमान में चर्चा दो बड़े आंकड़ों पर टिकी है—2.81 और 3.15। आज हम इन दोनों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे ताकि आप समझ सकें कि आपकी बेसिक सैलरी पर इसका क्या असर पड़ेगा।
फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक (Multiplier) है जिसका उपयोग पुराने वेतन आयोग से नए वेतन आयोग में जाने पर बेसिक सैलरी निर्धारित करने के लिए किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था।
2.81 vs 3.15: सैलरी कैलकुलेशन टेबल
नीचे दी गई टेबल से समझें कि यदि न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) बदलता है, तो आपकी बेसिक सैलरी पर क्या प्रभाव पड़ेगा:
| विवरण (Description) | फिटमेंट फैक्टर 2.81 | फिटमेंट फैक्टर 3.15 |
|---|---|---|
| न्यूनतम बेसिक (7th CPC) | ₹18,000 | ₹18,000 |
| नई न्यूनतम बेसिक (8th CPC) | ₹50,580 | ₹56,700 |
| वेतन वृद्धि (%) | लगभग 46% | लगभग 64% |
कर्मचारी यूनियनों की क्या मांग है?
जॉइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (JCA) और विभिन्न कर्मचारी संघों का तर्क है कि महंगाई और मुद्रास्फीति को देखते हुए फिटमेंट फैक्टर को कम से कम 3.15 रखा जाना चाहिए। हालांकि, सरकारी सूत्रों के अनुसार, वित्तीय बोझ को देखते हुए इसे 2.81 पर स्थिर किया जा सकता है।
विशेष नोट:
फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, आपका HRA, DA और पेंशन भी उसी अनुपात में बढ़ेंगे। 3.15 का मतलब होगा कि लोअर लेवल के कर्मचारियों की सैलरी में ऐतिहासिक उछाल आएगा।
क्या आप अपनी वर्तमान सैलरी पर फिटमेंट फैक्टर लागू करके देखना चाहते हैं?
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